
84 घंटा मंदिर (84 Bells Temple)
मंदिर के बारे में
84 घंटा मंदिर - आस्था की वो कहानी जहाँ हर मनोकामना की गूंज सुनाई देती है
बरेली के बदायूं रोड पर स्थित 84 घंटा मंदिर केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और चमत्कारों की एक जीवंत कहानी है। जैसे ही आप इस मंदिर के पास पहुँचते हैं, सबसे पहले जो चीज़ आपका ध्यान खींचती है, वह है यहाँ टंगे हुए अनगिनत घंटे — हर घंटा एक कहानी, एक विश्वास और एक पूरी हुई मनोकामना का प्रतीक है।
एक सपना जिसने बदल दी पूरी दिशा
इस मंदिर की शुरुआत भी किसी साधारण घटना से नहीं, बल्कि एक दिव्य संकेत से हुई थी। कहानी साल 1969 की है, जब एक परिवार इस जगह पर अपना घर बनाने की तैयारी कर रहा था। नींव की खुदाई शुरू हुई ही थी कि एक रात घर की महिला को माँ दुर्गा ने स्वप्न में दर्शन दिए। माँ ने उनसे कहा कि इस स्थान पर पहले उनका मंदिर बनवाया जाए। इस स्वप्न को सिर्फ एक सपना न मानकर, परिवार ने इसे आस्था का संकेत माना और घर बनाने से पहले माँ दुर्गा का मंदिर बनवाने का निर्णय लिया। कहा जाता है कि मंदिर बनने के दिन ही श्रद्धालुओं ने यहाँ एक ही दिन में 84 घंटे चढ़ाए, और तभी से इस स्थान का नाम “84 घंटा मंदिर” पड़ गया।
हर घंटा एक पूरी हुई मनोकामना
इस मंदिर की सबसे खास बात है यहाँ चढ़ाए गए घंटों की परंपरा। मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से यहाँ प्रार्थना करता है, उसकी मनोकामना पूरी होती है। और जब उसकी इच्छा पूरी हो जाती है, तो वह माँ के चरणों में एक घंटा चढ़ाता है। आज इस मंदिर में एक लाख से भी अधिक घंटे टंगे हुए हैं, और हर दिन यह संख्या बढ़ती जा रही है। जब हवा चलती है और ये सभी घंटे एक साथ बजते हैं, तो पूरा वातावरण भक्ति और ऊर्जा से भर जाता है।
अखंड ज्योति और दिव्य ऊर्जा
12 अक्टूबर 1969 को इस मंदिर में पहली बार ज्योति प्रज्वलित की गई थी। तब से लेकर आज तक यहाँ माँ दुर्गा की अखंड ज्योति लगातार जल रही है, जो इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है। यह ज्योति भक्तों के लिए विश्वास और आस्था का प्रतीक मानी जाती है।
एक ही परिसर में कई देवी-देवता
84 घंटा मंदिर केवल माँ दुर्गा तक सीमित नहीं है। यहाँ पर:
- भगवान शिव
- हनुमान जी
- बाबा भैरवनाथ
- साईं बाबा
- राधा-कृष्ण
- भगवान विष्णु
की भी प्रतिमाएँ स्थापित हैं, जिससे यह स्थान एक संपूर्ण धार्मिक केंद्र बन जाता है।
नवरात्रि और विशेष अवसर
नवरात्रि के दौरान यहाँ का दृश्य अद्भुत होता है। सुबह से लेकर रात तक भक्तों की लंबी कतारें लगी रहती हैं और पूरा मंदिर भक्ति और उत्साह से भर जाता है।
दर्शन का समय
🌅 सुबह: 4:00 बजे से 12:00 बजे तक
🌇 दोपहर बाद: 2:00 बजे से रात 10:00 बजे तक (दोपहर में सफाई के लिए कुछ समय मंदिर बंद रहता है)
पार्किंग सूचना (Parking Note)
यह मंदिर बदायूं–बरेली रोड के किनारे स्थित है, जहाँ अक्सर भीड़ रहती है। इस कारण यहाँ पार्किंग की सुविधा सीमित हो सकती है और वाहन खड़ा करने में समस्या आ सकती है। यात्रियों से अनुरोध है कि संभव हो तो पब्लिक ट्रांसपोर्ट (ऑटो, ई-रिक्शा आदि) का उपयोग करें, जिससे आपको सुविधा होगी और ट्रैफिक भी कम रहेगा।
Frequently Asked Questions
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गैलरी (Gallery)


यात्रा विवरण (Visit Details)
प्रातः दर्शन (Morning)
4:00 AM - 12:00 PM
संध्या दर्शन (Evening)
2:00 PM - 10:00 PM
प्रवेश शुल्क (Entry Fee)
सभी के लिए निःशुल्क
कृपया शालीन कपड़े पहनें और मंदिर परिसर के अंदर चमड़े की वस्तुएं ले जाने से बचें। मुख्य गर्भगृह में फोटोग्राफी प्रतिबंधित हो सकती है।
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